या भगवान की शक्ति बौना साबित हो गई?
कोयल का पंख लगाकर कौआ मधुर स्वर में आवाज नही निकल सकता ठीक उसी तरह भगवा धारी वस्त्र पहनकर हर कोई धर्म का रक्षक नही हो सकता..धर्म का रक्षक मनुष्य कैसे हो सकता?क्
स्नातक में शोशलोजी विषय रहा..और राजनीति शास्त्र से मनु विधान से लेकर कई विधान पढ़ने को मिला...धर्म का उद्भव संस्कृत के शब्द से हुआ कुछ लोग मानते है जिसका शब्द धारण करना होता है।सच्चरित्र को धारण करने वाला धर्म होता है।इसका कोई रक्षक या भक्षक नही...
ज्यादा जानकारी के लिंक देता हूं..
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स्नातक में मुझे समझ आ गया जो आज नए भगवा वस्त्र पहनकर धर्म का ठिकेदार बैठे है ये धर्म के लठैत है।मतलब साफ है लोगों को धर्म और आस्था के नाम पर बेवकूफ बनाना है..
भारत की धर्म नगरी काशी मानी जाती है।वहां कई पंडितों से उलझ जाते थे तो अंतिम में कहते कि भाई तुमको समझाना और पैदल दिल्ली जाना बराबर है।
काशी में विश्वनाथ मंदिर है।एक दिन जेलर साहिबा बोली चलो बाबा का आशीर्वाद ले लेते..मोबाइल से लेकर सब कुछ बाहर रखना पड़ा..उसके रखने का चार्ज100 था यानी लूट का दरवाजा में मेरा स्वागत हो चुका...अंदर गया तो एक से एक मंदिर लेकिन जिस बाबा की खोज में गए वो तो दिखें नही...अजीब बात तब लगा मोबाइल से लेकर चप्पल जूता खोलबा लिया किंतु पैसे ले जाने की इजाजत था।यानी लूटने के अगले दरवाजा का रास्ता खटखटा दीजिए।वहां पहुंचा तो गंगा जल और फूल के लिए 150 रूपया दीजिए...यहां तक ठीक था जब उसे चढ़ाने गए तो इसमें दक्षिणा दीजिए...
तब मुझे समझ में आया कि भारत में जीएसटी भले अब आया किंतु धर्म में ये व्यवस्था कई सदियों से लागू है...
जेलर साहिबा उधर जल और चढ़ावा दे रही और इधर एक बाबा से मैने सवाल करना शुरू कर दिया।मैने पूछा कि विश्वनाथ बाबा कहां मिलेंगे तो उसने मूर्ति दिखा दिया...
यहां जो मजा था वो और कहां?
भीड़ में सुंदर सुंदर लड़कियां और प्राइवेट पार्ट को टच करना तो आस्था के नाम पर सब कुछ जायज था।मैने जेलर साहिबा को कहा बाबा का दर्शन तुम्हे करना है करो मैं यहां से चला...ऐसी जगह लाई हो जहां लड़कियां से लड़के कुछ भी कर लेता और वो चुप रहती..हमसे बर्दाश्त नहीं होगा?कुछ देर रुके तो मेरी आवाज मंदिर परिसर में गूंजने लगेगी...
वो सब कुछ बगल में रखकर मेरे साथ बाहर आ गई।
पटना का महावीर मंदिर...
काफी नामी गामी है।उसमे एक व्यवस्था था वीआईपी पास...ये क्या होता भाई...यानी ज्यादा रूपया दीजिए तुरंत दर्शन पाइए...लाइन में लगना की आवश्यकता ही नहीं...
भगवान के प्रति आस्था है ना..मेरा एक काम कीजिए.. गाय और गोबर दोनो पवित्र माना जाता है। गाय देना संभव नहीं इसलिए दक्षिणा में गोबर दीजिए और पुजारी का बीपी चेक कीजिए...यकीन आ जायेगा कि आस्था है या धंधा...
धर्म एक ऐसा हथियार है जो डर दिखाकर सब कुछ करवा सकता...आपकी रोटी छोड़िए बेटी तक को धर्म के नाम पर छीन लेता किंतु यकीन नही होगा...
धर्म भगवान ये सब काल्पनिक है।ऐसी ऐसी बाते लिखी जो दुनिया के किताबों में नही लिखा...
उदाहरण -
ब्रह्मा के मुख से ब्राह्मण,भुजा से क्षत्रिय,जंघा से वैश्य और पैर से शुद्र...
जब सभी आपके पुत्र हुए तो एक दूसरे से छुआ छूत कैसे हो गया?
ब्रह्मा जी मिलते तो उनसे मेरा पहला सवाल होता ब्रह्मा जी आप स्त्री है या पुरुष क्योंकि बच्चे जन्म महिला देती तो आप कैसे दिए?
आप सृष्टि के निर्माता है तो चार बच्चे को जातीय आधार पर दिया तो रोम,इटली फ्रांसीसी वाले किस कास्ट से बिलांग करते है?
सृष्टि के निर्माता जी आपको जापान नही जानता,चीन नही जानता,अमेरिका नही जानता तो फिर सृष्टि के निर्माता कैसे बने?
धर्म और भगवान धंधा चलाने के लिए बनाया गया।



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