Posts

या भगवान की शक्ति बौना साबित हो गई?

Image
कोयल का पंख लगाकर कौआ मधुर स्वर में आवाज नही निकल सकता ठीक उसी तरह भगवा धारी वस्त्र पहनकर हर कोई धर्म का रक्षक नही हो सकता..धर्म का रक्षक मनुष्य कैसे हो सकता?क् स्नातक में शोशलोजी विषय रहा..और राजनीति शास्त्र से मनु विधान से लेकर कई विधान पढ़ने को मिला...धर्म का उद्भव संस्कृत के शब्द से हुआ कुछ लोग मानते है जिसका शब्द धारण करना होता है।सच्चरित्र को धारण करने वाला धर्म होता है।इसका कोई रक्षक या भक्षक नही... ज्यादा जानकारी के लिंक देता हूं.. . स्नातक में मुझे समझ आ गया जो आज नए भगवा वस्त्र पहनकर धर्म का ठिकेदार बैठे है ये धर्म के लठैत है।मतलब साफ है लोगों को धर्म और आस्था के नाम पर बेवकूफ बनाना है.. भारत की धर्म नगरी काशी मानी जाती है।वहां कई पंडितों से उलझ जाते थे तो अंतिम में कहते कि भाई तुमको समझाना और पैदल दिल्ली जाना बराबर है। काशी में विश्वनाथ मंदिर है।एक दिन जेलर साहिबा बोली चलो बाबा का आशीर्वाद ले लेते..मोबाइल से लेकर सब कुछ बाहर रखना पड़ा..उसके रखने का चार्ज100 था यानी लूट का दरवाजा में मेरा स्वागत हो चुका...अंदर गया तो एक से एक मंदिर लेकिन जिस बाबा की खोज में गए वो तो दिखें न...

ई.वी. रामासामी पेǐरयार

ई.वी. रामासामी पेǐरयार जन्म 17 ͧसतम्बर 1879 इरोड, मद्रास प्रेिजडेंसी, ǒब्रǑटश भारत (अब इरोड िजला, तͧमलनाडु, भारत) मृत्यु24 Ǒदसम्बर 1973 (उम्र 94) वेलोर, तͧमलनाडु, भारत अन्य नाम ई.वी.आर पेǐरयार, Vaikam Veerar, व्यवसाय सामािजक कारकु न, राजनेता, reformist राजनैǓतक पाटर्टी भारतीय राçट्रीय कांग्रेस जिèटस पाटर्टी संèथापक द्रͪवदर कड़गम जीवनसाथी नगममाई (Ǔनधन 1933), मǓनअमाई(1948- 1973) इरोड वेंकट नायकर रामासामी (17 ͧसतम्बर, 1879-24 Ǒदसम्बर, 1973) िजन्हे पेǐरयार (तͧमल मेंअथर्फ -सम्माǓनत व्यिक्त) नाम सेभी जाना जाता था, बीसवीं सदी के तͧमलनाडुके एक प्रमुख राजनेता थे। इन्होंनेजिèटस पाटर्टी का गठन ͩकया िजसका ͧसद्धान्त èवाͧभमानी Ǒहन्दुत्व का ͪवरोध था। जो Ǒहंदुत्व दͧलत समाज के ͪवनाश का एकमात्र कारण था '[1] इरोड वेंकट नायकर रामासामी बचपन[ इनका जन्म 17 ͧसतम्बर 1879 को पिश्चमी तͧमलनाडुके इरोड मेंएक सम्पन्न, परम्परावादी Ǒहन्दू (द्रͪवड़ वैश्य[3]) पǐरवार मेंहुआ था। १८८५ मेंउन्होंनेएक èथानीय प्राथͧमक ͪवद्यालय मेंदाͨखला ͧलया। पर कोई पाँच साल सेकम की औपचाǐरक ͧशक्षिा ͧमलनेके बाद ही उन्हेंअपनेͪपता के व्यवसाय से...

यह कोई रहèय नहीं हैͩक भारतीय रेलवेको धन की सख्त जरूरत है।

  यह कोई रहèय नहीं हैͩक भारतीय रेलवेको धन की सख्त जरूरत है। अगर देश के रेल नेटवकर्व को वाèतव मेंमजबूत करना हैऔर ट्रेनों की गǓत बढ़ाकर और समͪपर्वत फ्रे ट कॉǐरडोर खोलकर इसकी क्षमता को बढ़ाना है , तो भारी Ǔनवेश की जरूरत है। Ǔनवेश कौन करेगा ? ͪवकͧसत देशों मेंहम जो बुǓनयादी ढांचा देखतेहैं , वह सब उनकी सरकारों द्वारा बनाया गया था। ͩकसी भी Ǔनजी ͨखलाड़ी मेंन तो इÍछाशिक्त थी और न ही क्षमता। रेलवेमेंǓनवेश भी फायदेमंद है। अथर्वशाèत्री अरͪव ंद सुब्रमण्यम द्वारा ͩकए गए एक आͬथर्वक सवर्वेक्षण के अनुसार , यǑद आप रेलवेमें 1 रुपयेका Ǔनवेश करतेहैं , तो यह अथर्वव्यवèथा में 5 रुपयेउत्पन्न करता है। चीनी सरकार भारत की तुलना मेंअपनेबुǓनयादी ढांचेमें 11 गुना अͬधक Ǔनवेश करती है , और आज , तीन चीनी सावर्वजǓनक क्षेत्र की कं पǓनयांफॉÍयूर्वन 500 रैंͩकं ग मेंशीषर्वपांच मेंशाͧमल हैं। यह कोई रहèय नहीं हैͩक भारतीय रेलवेको धन की सख्त जरूरत है। अगर देश के रेल नेटवकर्व को वाèतव मेंमजबूत करना हैऔर ट्रेनों की गǓत बढ़ाकर और समͪपर्वत फ्रे ट कॉǐरडोर खोलकर इसकी क्षमता को बढ़ाना है , तो भारी Ǔनवेश की जरूरत है। भारत के Ǔनयंत्रक...